एल्बेंडाजोल खाने से कई बच्चो की हालत बिगड़ी

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बच्चो को पेट के कीड़ो से बचाव के लिये खिलाई जाने वाली दवा अब बच्चो के लिये खतरा बनती नज़र आ रही है हल्दौर क्षेत्र के सरकारी स्कूल में बच्चो को पेट के कीड़ो की दवाई एल्बेंडाजोल खिलाने के बाद उलटी, पेट दर्द और चक्कर आने से हालत बिगड़ने के बाद कई बच्चो को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा वहीं अब स्योहारा क्षेत्र में भी जहां एक मासूम की मौत हो गई वहीं आधा दर्जन से अधिक बच्चो की हालत गंभीर बनी हुई है मामला स्योहारा थाना क्षेत्र के ग्राव डेहरा बुलंदी की है जहाँ स्कूल में बच्चो को पेट के कीड़ो की दवाई खिलाने के बाद कई बच्चो की हालत बिगड़ गई, ग्रामीणो का दावा है कि दवाई खाने से पहले उनके बच्चे बिलकुल ठीक थे लेकिन स्कूूल में दवाई खिलाये जाने के बाद से ही कई बच्चो की हालत बिगड़ गई, गांव के मांटेसरी स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चे दवाई खाने के बाद से बीमार हो गये है दवाई खाने के बाद ही 8 साल के शीशपाल की भी तबीयत खराब हुई, जिसके स्योहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहा से उसकी हालत चिंताजनक देखते हुए बिजनौर रेैफर कर दिया गया, लेकिन उपचार के दौरान ही 8 साल के मासूम शीशपाल ने दम तोड़ दिया, इस घटना के बाद जहां गांव में शोक है वहीं आधा दर्जन से ज्यादा बीमार बच्चो के परिजनो को भी चिंता सताने लगी है दरअसल गांव में बीमार हुए सभी बच्चो को स्कूल में पेट के कीड़ो की दवाई एल्बेंडा जोल खिलाई गई थी आरोप है कि इसी दवाई खाने के बाद बच्चो की हालत बिगड़ी है उधर जिला स्वास्थ्य विभाग के मुखिया मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 राकेश मित्तल की माने तो उनके संज्ञान में एक बच्चे की मौत का मामला तो सामने आया है लेकिन पेट के कीड़ो की दवाई एल्बेंडाजोल खाने से बच्चो की हालत बिगड़ने की जानकारी मिलने से उन्होने इंकार किया, साथ ही सीएमओं ने बताया कि एल्वेंडाजोल दवाई सालो से बच्चो को खिलाई जाती रही है लेकिन आजतक इस गोली को खाने के बाद किसी की मौत होने का मामला सामने नही आया है स्योहारा में बच्चे की मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक टीम मौके पर भेज दी है और बच्चे की मौत के कारणो का पता लगाया जा रहा है हांलाकि स्योहारा में पेट की कीड़ो की दवाई खाने के बाद हुई बच्चे की मौत का कारण कुछ और भी हो सकता है लेकिन दवाई खाने के बाद जनपद के अलग अलग क्षेत्रो से बच्चो की तबीयत बिगड़ने के मामलो से इंकार नही किया जा सकता है विभाग को चाहिये कि इस मामले को गंभीरता से ले ताकि स्वास्थ्य योजनाओं के सही क्रियान्वयन में विभाग को दिक्कत न हो और लोगो का भरोसा भी स्वास्थ्य प्रणाली पर बना रहे

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